जाती हुई धूप संध्या की
सेंक रही है मां
अपना अप्रासंगिक होना
देख रही है मां
भरा हुआ घर है
नाती-पोतों से, बच्चों से
अनबोला बहुओं का बोले
बंद खिड़कियों से
इधर-उधर उड़ती सी नज़रें
फेंक रही है मां
फूली सरसों नहीं रही
अब खेतों में मन के
पिता नहीं हैं, अब नस-नस
क्या कंगन सी खनकें
रस्ता थकी हुई यादों का
छेंक रही है मां
'रस्ता थकी हुई यादों का' से अभिप्राय है -
Answer & explanation
Correct answer: option 2
सही उत्तर विकल्प (2) है → स्मृतियों का घिर जाना
“रस्ता थकी हुई यादों का / छेंक रही है मां” — माँ पुरानी स्मृतियों से घिरी है; थकी हुई यादें उसके मन का रास्ता घेरे हुए हैं।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: यादों को भुलाना — माँ यादें भुला नहीं रही, उनसे घिरी है।
विकल्प 3: याद को रास्ते पर रखना — यह पंक्ति का शाब्दिक अर्थ है, भावार्थ नहीं।
विकल्प 4: याद करना — यह बहुत सामान्य अर्थ है; पंक्ति यादों के घिर आने का भाव देती है।