निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर सम्बंधित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
रोटी उसकी, जिसका अनाज, जिसकी जमीन, जिसका श्रम है,
अब कौन उलट सकता है स्वतंत्रता का सीधा क्रम है।
आज़ादी है अधिकार परिश्रम का पुनीत फल पाने का,
आज़ादी है अधिकार शोषणों की धज्जियाँ उड़ाने का।
गौरव की भाषा नई सीख, भिखमंगों की आवाज बदल,
सिमटी बाहों को खोल गरुड़, उड़ने का अब अंदाज बदल।
स्वाधीन मनुज की इच्छा के आगे पहाड़ हिल सकते हैं,
रोटी क्या? ये अम्बरवाले सारे शृंगार मिल सकते हैं।
"सिमटी बाहों को खोल गरुड़"- पंक्ति में "गरुड़" किसका प्रतीक है ?
Answer & explanation
Correct answer: option 3
सही उत्तर विकल्प (3) है → स्वतंत्र और शक्तिशाली मनुष्य का
“सिमटी बाहों को खोल गरुड़, उड़ने का अब अंदाज बदल” — पक्षियों का राजा गरुड़ यहाँ स्वतंत्र और शक्तिशाली मनुष्य का प्रतीक है, जिसे कवि खुलकर उड़ने को कहता है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: आलस्य से भरे पक्षी का — गरुड़ शक्ति का प्रतीक है, आलस्य का नहीं।
विकल्प 2: पराधीन मनुष्य का — कवि उसे स्वाधीन होकर उड़ने को कहता है।
विकल्प 4: डर और संकोच का — डर-संकोच 'सिमटी बाहों' में है, गरुड़ में नहीं।