निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्न का सही विकल्प का चयन कीजिए।
ऋतु वसंत का सुप्रभात था
मंद मंद था अनिल बह रहा
बालारुण की मृदु किरणें थीं
अगल-बगल स्वर्णिम शिखर थे
एक-दूसरे से विरहित हो
अलग-अलग रहकर ही
जिनको सारी रात बितानी होती,
निशा काल से चिर अभिशापित
बेबस उस चकवा-चकई का
बंद हुआ क्रंदन, फिर उनमें
उस महान सरवर के तीरे
शैवालों की हरी दरी पर
प्रणय-कलह छिड़ते देखा है।
बादल को घिरते देखा है।
सरोवर के तट पर कवि ने क्या देखा?
Answer & explanation
Correct answer: option 3
सही उत्तर विकल्प (3) है → चकवा-चकई को प्रेम भरी तकरार करते हुए
कवि ने सरोवर के तीर पर “शैवालों की हरी दरी पर / प्रणय-कलह छिड़ते देखा है।” प्रणय-कलह का अर्थ है प्रेम भरी तकरार।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: बिछुड़ते हुए — वे रात भर बिछुड़े रहते हैं; सुबह तो उनका मिलन हुआ।
विकल्प 2: रोते हुए — सुबह उनका 'क्रंदन' बंद हो गया था।
विकल्प 4: खेलते हुए — कविता में 'प्रणय-कलह' है, खेल नहीं।