धोखा न दो भैया मुझे, इस भाँति आकर के यहाँ;
मझधार में मुझको बहाकर तात जाते हो कहाँ?
सीता गई तुम भी चले मैं भी न जीऊँगा यहाँ।
सुग्रीव बोले साथ में सब जाएँगे वानर वहाँ।
प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा रस है?
Answer & explanation
Correct answer: option 3
सही उत्तर विकल्प (3) है → करुण रस
“सीता गई तुम भी चले मैं भी न जीऊँगा यहाँ” — यहाँ प्रिय भाई के बिछुड़ने पर राम का विलाप है। इसमें शोक का भाव है, जो करुण रस का स्थायी भाव है।
अन्य विकल्प — रौद्र (क्रोध), भयानक (भय) और वीभत्स (जुगुप्सा) — के स्थायी भाव इन पंक्तियों में नहीं हैं।