'वीर तुम बढ़े चलो, धीर तुम बढ़े चलो।
सामने पहाड़ हो कि सिंह की दहाड़ हो।
तुम कभी रुको नहीं तुम कभी झुको नहीं।'
प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा रस है?
Answer & explanation
Correct answer: option 3
सही उत्तर विकल्प (3) है → वीर रस
इन पंक्तियों में बाधाओं के बीच भी आगे बढ़ते रहने का उत्साह जगाया गया है: “वीर तुम बढ़े चलो, धीर तुम बढ़े चलो”। उत्साह स्थायी भाव वाला रस वीर रस है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: रौद्र रस — स्थायी भाव क्रोध।
विकल्प 2: करुण रस — स्थायी भाव शोक।
विकल्प 4: भयानक रस — स्थायी भाव भय।