निम्नलिखित पद्यांश के आधार पर इससे संबंधित प्रश्न का उत्तर दीजिए।
अंखियाँ हरि-दरसन की भूखी।
कैसे रहें रूप-रस रांची ये बतियां सुनि रूखी॥
अवधि गनत इकटक मग जोवत तब ये तौ नहिं झूखी।
अब इन जोग संदेसनि ऊधो, अति अकुलानी दूखी॥
बारक वह मुख फेरि दिखावहु दुहि पय पिवत पतूखी।
सूर, जोग जनि नाव चलावहु ये सरिता है सूखी॥
उक्त पद में नेत्र किसके दर्शन के लिए व्याकुल हैं?
Answer & explanation
Correct answer: option 1
सही उत्तर विकल्प (1) है → श्रीकृष्ण के
“अंखियाँ हरि-दरसन की भूखी” — नेत्र हरि (श्रीकृष्ण) के दर्शन के लिए व्याकुल हैं।
अन्य विकल्प — श्रीराम, निर्गुण ब्रह्म और शिव — गोपियों के नेत्र इनके दर्शन के लिए व्याकुल नहीं हैं।