निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित अगले पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
स्याम म्हाने चाकर राखो जी,
गिरधारी लाला म्हाँने चाकर राखोजी।
चाकर रहस्यूँ बाग लगास्यूँ नित उठ दरसण पास्यूँ।
बिन्दरावन री कुंज गली में, गोविन्द लीला गास्यूँ।
चाकरी में दरसण पास्यूँ, सुमरण पास्यूँ खरची।
भाव भगती जागीरी पास्यूँ, तीनूं बाताँ सरसी।
मोर मुगट पीताम्बर सौहे, गल वैजन्ती माला।
बिन्दरावन में धेनु चरावे, मोहन मुरली वाला।
ऊँचा ऊँचा महल बणावं बिच बिच राखूँ बारी।
साँवरिया रा दरसण पास्यूँ, पहर कुसुम्बी साड़ी।
आधी रात प्रभु दरसण, दीज्यो जमनाजी रे तीरां।
मीराँ रा प्रभु गिरधर नागर, हिवड़ो घणो अधीराँ॥
पद्यांश में 'तीनूं बाताँ' किनकी ओर संकेत करती हैं?
Answer & explanation
Correct answer: option 4
सही उत्तर विकल्प (4) है → दर्शन, स्मरण और भाव-भक्ति
चाकरी से मिलने वाली तीन चीज़ें हैं — दर्शन, स्मरण (खर्ची) और भाव-भक्ति (जागीर): “चाकरी में दरसण पास्यूँ, सुमरण पास्यूँ खरची। भाव भगती जागीरी पास्यूँ, तीनूं बाताँ सरसी”।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: बाग, महल और साड़ी — ये सेवा और शृंगार से जुड़े प्रसंग हैं, 'तीनूं बाताँ' से नहीं।
विकल्प 2: मोर मुकुट, पीतांबर और माला — यह कृष्ण के रूप का वर्णन है।
विकल्प 3: धेनु, मुरली और कुंज गली — ये वृंदावन की लीला से जुड़े हैं।