निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित अगले पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
बर्फ़ की चादर ओढ़े सोई, चुप-चुप ऊँची घाटी है,
सीमा पर मैं जाग रहा हूँ, साथ मेरे यह माटी है।
सन-सन करती शीत हवाएँ, गालों को छू जाती हैं,
माँ के आँचल की गरमी की, याद मुझे दे जाती हैं।
दूर कहीं मेरे गाँव में, सरसों फूल रही होगी,
तुलसी के चौरे पर माँ, दीपक बाल रही होगी।
बाबा खेतों से लौटे होंगे, कंधे पर हल धरकर,
बहना राह निहार रही होगी, चिट्ठी की आस लगाकर।
पर पलकों में नींद नहीं है, मन में कोई डर भी नहीं,
जिस धरती ने जन्म दिया, उससे बढ़कर घर भी नहीं।
चाँद-सा उजला यह हिम-पर्वत, मेरा मंदिर, मेरा धाम,
इसकी रक्षा में मिट जाऊँ, तो भी अमर रहेगा नाम।
सीमा पर तैनात सैनिक की मनःस्थिति के विषय में कौन-सा कथन सही है?
Answer & explanation
Correct answer: option 2
सही उत्तर विकल्प (2) है → वह जाग रहा है, पर उसके मन में कोई डर नहीं है
सैनिक जागकर पहरा दे रहा है और निर्भय है: “पर पलकों में नींद नहीं है, मन में कोई डर भी नहीं”।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: थका और डरा हुआ — कवि स्पष्ट कहता है कि मन में कोई डर नहीं।
विकल्प 3: छुट्टी की प्रतीक्षा — सैनिक के लिए धरती से बढ़कर घर भी नहीं; छुट्टी की बात नहीं है।
विकल्प 4: नींद में सपने — उसकी पलकों में नींद नहीं है; गाँव की याद वह जागते हुए करता है।