निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
किसी पेड़ पर टाँग दो
अपनी निष्ठा, विश्वास, ईमानदारी
के अस्त्र-शस्त्र
चलते बनो
अज्ञातवास की ओर
ध्यान रहे इस युग में
इसकी कोई समय और सीमा नहीं।
पैरों से जुते कन्धों की गाड़ी पर
हर इनसान ढो रहा है अपनी ज़िन्दगी
स्वयं ही सवार है किस्मत के पथ पर
अपनी मिट्टी की गाड़ी पर
क्या पता वह कब टकरा जाए
उस समय के पत्थर से
जो उसे मंजिल की दूरी नहीं,
उम्र का हिसाब बता रहा हो
शायद बोझ समझ इसलिए वह ज़िन्दगी
अपनी मिट्टी की गाड़ी पर ढो रहा हो।
कवि निष्ठा, विश्वास और ईमानदारी को कहाँ टाँगने की बात कर रहा है?
Answer & explanation
Correct answer: option 1
सही उत्तर विकल्प (1) है → पेड़ पर
काव्यांश कहता है: “किसी पेड़ पर टाँग दो / अपनी निष्ठा, विश्वास, ईमानदारी”।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 2: दीवार में गड़ी कील पर — काव्यांश में दीवार या कील का उल्लेख नहीं।
विकल्प 3: कन्धों पर — कन्धों की गाड़ी पर इनसान अपनी ज़िन्दगी ढो रहा है।