'वीर तुम बढ़े चलो, धीर तुम बढ़े चलो।
सामने पहाड़ हो कि सिंह की दहाड़ हो।'
उपर्युक्त पंक्तियों में कौन सा रस है?
Answer & explanation
Correct answer: option 2
सही उत्तर विकल्प (2) है → वीर रस
पंक्तियों में पहाड़ और सिंह की दहाड़ जैसी बाधाओं के बीच भी आगे बढ़ने का उत्साह है; उत्साह वीर रस का स्थायी भाव है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: रौद्र रस — स्थायी भाव क्रोध।
विकल्प 3: भयानक रस — स्थायी भाव भय; यहाँ भय पर विजय का भाव है।
विकल्प 4: अद्भुत रस — स्थायी भाव विस्मय।