निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्न के लिए सही विकल्प चुन कर लिखिए
पिता के ठीक विपरीत थीं हमारी बेपढ़ी-लिखी माँ |धरती से कुछ ज्यादा ही धैर्य और सहनशील थी शायद उनमें | पिता जी की हर ज्यादती को अपना प्राप्य और बच्चों की हर उचित-अनुचित फ़रमाइश और ज़िद को अपना फर्ज़ समझकर बड़े सहज भाव से स्वीकार करती थीं वे | उन्होंने ज़िन्दगी भर अपने लिए कुछ माँगा नहीं , चाहा नहीं ..... केवल दिया ही दिया | हम भाई-बहनों का सारा लगाव ( शायद सहानुभति से उपजा) माँ के साथ था , लेकिन निहायत असहाय मज़बूरी में लिप्त उनका यह त्याग कभी मेरा आदर्श नहीं बन सका .....न उनका त्याग , न उनकी सहिष्णुता | खैर , जो भी हो , अब यह पैतृक – पुराण यहीं समाप्त क्र अपने पर लौटती हूँ |
लेखिका ने अपनी माँ के धैर्य और सहनशक्ति की तुलना किससे की है ?
Answer & explanation
Correct answer: option 1
दिए गए गद्यांश में, लेखिका ने अपनी माँ के धैर्य और सहनशक्ति की तुलना धरती से की है। गद्यांश में कहा गया है कि लेखिका की माँ धरती से कुछ ज्यादा ही धैर्य और सहनशील थीं। वे पिता जी की हर ज्यादती को अपना प्राप्य और बच्चों की हर उचित-अनुचित फ़रमाइश और ज़िद को अपना फर्ज़ समझकर बड़े सहज भाव से स्वीकार करती थीं। वे ज़िन्दगी भर अपने लिए कुछ माँगा नहीं, चाहा नहीं ..... केवल दिया ही दिया।