निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित अगले पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
बर्फ़ की चादर ओढ़े सोई, चुप-चुप ऊँची घाटी है,
सीमा पर मैं जाग रहा हूँ, साथ मेरे यह माटी है।
सन-सन करती शीत हवाएँ, गालों को छू जाती हैं,
माँ के आँचल की गरमी की, याद मुझे दे जाती हैं।
दूर कहीं मेरे गाँव में, सरसों फूल रही होगी,
तुलसी के चौरे पर माँ, दीपक बाल रही होगी।
बाबा खेतों से लौटे होंगे, कंधे पर हल धरकर,
बहना राह निहार रही होगी, चिट्ठी की आस लगाकर।
पर पलकों में नींद नहीं है, मन में कोई डर भी नहीं,
जिस धरती ने जन्म दिया, उससे बढ़कर घर भी नहीं।
चाँद-सा उजला यह हिम-पर्वत, मेरा मंदिर, मेरा धाम,
इसकी रक्षा में मिट जाऊँ, तो भी अमर रहेगा नाम।
पद्यांश का उचित शीर्षक होगा -
Answer & explanation
Correct answer: option 3
सही उत्तर विकल्प (3) है → सीमा का प्रहरी
पूरा पद्यांश सीमा पर जागते उस सैनिक का है जो गाँव को याद करते हुए भी देश-रक्षा को सबसे ऊपर रखता है: “सीमा पर मैं जाग रहा हूँ, साथ मेरे यह माटी है”।
अन्य विकल्प — गाँव की फूली सरसों, बर्फ़ीली घाटी का सौंदर्य और बहन की चिट्ठी — पद्यांश के केवल एक-एक अंश को बताते हैं, केंद्रीय भाव (सैनिक का कर्तव्य और त्याग) को नहीं।