निम्नलिखित पद्यांश के आधार पर अगले पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
अस्ताचल रवि, जल छल-छल छवि,
स्तब्ध विश्वकवि, जीवन उन्मन।
मन्द पवन बहती सुधि रह रह,
परिमल की कह कथा पुरातन।
दूर नदी पर नौका सुन्दर,
दिखी मृदु टार बहती ज्यों स्वर।
वहां स्नेह की प्रतनु देह की,
बिना गेह की बैठी नूतन।
ऊपर शोभित मेघ सत्र सित,
नीचे अमित नील जल दोलित।
ध्यान नयन, मन चिन्त्य-प्राण-धन,
किया शेष रवि ने कर अर्पण।
उपर्युक्त कविता में आए शब्द 'प्रतनु' का क्या अर्थ है ?
Answer & explanation
Correct answer: option 2
सही उत्तर विकल्प (2) है → क्षीण
प्रतनु (प्र + तनु) का अर्थ है अत्यंत पतला, क्षीण: “वहां स्नेह की प्रतनु देह की”।
अन्य विकल्प — प्रमुदित (प्रसन्न), मृत और प्रेत — 'प्रतनु' के अर्थ नहीं हैं।