निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित अगले पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
थोड़ी देर में रही-सही आग भी बुझ गई। कुशल यह हुई कि और किसी के घर में आग न लगी। सब लोग इस दुर्घटना पर आलोचनाएँ करते हुए विदा हुए। सन्नाटा छा गया। किंतु सूरदास अब भी वहीं बैठा हुआ था। उसे झोंपड़े के जल जाने का दुःख न था, बरतन आदि के जल जाने का भी दुःख न था; दुःख था उस पोटली का, जो उसकी उम्र भर की कमाई थी, जो उसके जीवन की सारी आशाओं का आधार थी, जो उसकी सारी यातनाओं और रचनाओं का निष्कर्ष थी। इस छोटी सी पोटली में उसका, उसके पितरों का और उसके नामलेवा का उद्धार संचित था। यही उसके लोक और परलोक, उसकी दीन-दुनिया का आशा-दीपक थी। उसने सोचा—पोटली के साथ रुपये थोड़े ही जल गए होंगे? अगर रुपये पिघल भी गए होंगे, तो चाँदी कहाँ जाएगी? क्या जानता था कि आज यह विपत्ति आनेवाली है, नहीं तो यहीं न सोता! पहले तो कोई झोंपड़ी के पास आता ही न और अगर आग लगाता भी, तो पोटली को पहले ही निकाल लेता। सच तो यों है कि मुझे यहाँ रुपये रखने ही न चाहिए थे। पर रखता कहाँ? मुहल्ले में ऐसा कौन है, जिसे रखने को देता? हाय! पूरे पाँच सौ रुपये थे, कुछ पैसे ऊपर हो गए थे। क्या इसी दिन के लिए पैसे-पैसे बटोर रहा था?
गद्यांश के अनुसार सूरदास की पोटली के विषय में कौन-से कथन सही हैं?
(A) वह उसकी उम्र भर की कमाई थी।
(B) उसमें पूरे पाँच सौ रुपये और कुछ पैसे थे।
(C) उसने पोटली मुहल्ले के किसी विश्वसनीय व्यक्ति के पास रखी थी।
(D) वह उसके लोक और परलोक का आशा-दीपक थी।
(E) उसमें सोने के सिक्के थे।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :
Answer & explanation
Correct answer: option 4
सही उत्तर विकल्प (4) है → केवल (A), (B) और (D)
(A) वह उसकी उम्र भर की कमाई थी। — सही; गद्यांश: “जो उसकी उम्र भर की कमाई थी”।
(B) उसमें पूरे पाँच सौ रुपये और कुछ पैसे थे। — सही; गद्यांश: “पूरे पाँच सौ रुपये थे, कुछ पैसे ऊपर हो गए थे”।
(C) उसने पोटली मुहल्ले के किसी विश्वसनीय व्यक्ति के पास रखी थी। — गलत; वह सोचता है: “मुहल्ले में ऐसा कौन है, जिसे रखने को देता?”; पोटली झोंपड़ी में ही थी।
(D) वह उसके लोक और परलोक का आशा-दीपक थी। — सही; गद्यांश: “यही उसके लोक और परलोक, उसकी दीन-दुनिया का आशा-दीपक थी”।
(E) उसमें सोने के सिक्के थे। — गलत; सूरदास सोचता है: “रुपये पिघल भी गए होंगे, तो चाँदी कहाँ जाएगी?”; सोने का उल्लेख नहीं है।