निम्नलिखित पद्यांश के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
न भी हूँ मैं तुम्हारी रागिनी भी हूँ!
नींद थी मेरी अचल निस्पंद कण-कण में,
प्रथम जागृति थी जगत के प्रथम स्पंदन में;
प्रलय में मेरा पता पदचिह्न जीवन में,
शाप हूँ जो बन गया वरदान बंधन में;
कूल भी हूँ कूलहीन प्रवाहिनी भी हूँ!
नयन में जिस के जलद वह तृषित चातक हूँ,
शलभ जिसके प्राण में वह निठुर दीपक हूँ;
फूल को उर में छिपाए विकल बुलबुल हूँ,
एक हो कर दूर तन से छाँह वह चल हूँ;
दूर तुम से हूँ अखंड सुहागिनी भी हूँ!
पद्यांश के अनुसार क्रम लगाइए
नींद थी मेरी अचल.......
A. पदचिह्न जीवन में
B. वरदान बंधन में
C. निस्पंद कण-कण में
D. छाँह वह चल हूँ
E. प्रथम स्पंदन में
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
Answer & explanation
Correct answer: option 1
सही उत्तर विकल्प (1) है → C, E, A, B, D
(C) निस्पंद कण-कण में — पहली पंक्ति: 'नींद थी मेरी अचल निस्पंद कण-कण में'।
(E) प्रथम स्पंदन में — दूसरी पंक्ति: 'प्रथम जागृति थी जगत के प्रथम स्पंदन में'।
(A) पदचिह्न जीवन में — तीसरी पंक्ति: 'प्रलय में मेरा पता पदचिह्न जीवन में'।
(B) वरदान बंधन में — चौथी पंक्ति: 'शाप हूँ जो बन गया वरदान बंधन में'।
(D) छाँह वह चल हूँ — बाद के अंश में: 'एक हो कर दूर तन से छाँह वह चल हूँ'।