निम्नलिखित पंक्तियों में कौन-सा रस है?
"साँझ ढले बगिया में दोनों, बैठे हाथ में हाथ लिए।
प्रिय की बातें सुन-सुन गोरी, मुख पर लाज भरी मुसकान लिए।"
Answer & explanation
Correct answer: option 2
सही उत्तर विकल्प (2) है → संयोग शृंगार
प्रेमी-प्रेमिका साथ बैठे हैं (हाथ में हाथ), नायिका लजाकर मुसका रही है; यह मिलन का वर्णन है, अतः संयोग शृंगार है।
स्थायी भाव रति; अनुभाव — मुसकान; संचारी भाव — लज्जा।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: वियोग शृंगार — प्रिय से बिछुड़ने पर विरह का वर्णन; यहाँ नायक-नायिका साथ हैं।
विकल्प 3: हास्य — स्थायी भाव हास; यहाँ मुसकान प्रेम और लज्जा की है, किसी विचित्रता पर हँसी नहीं।
विकल्प 4: शांत — संसार की नश्वरता से उत्पन्न निर्वेद शांत रस है; यहाँ ऐसा भाव नहीं है।