निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित अगले पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
जाड़े के दिन थे और रात का समय। नमक के सिपाही, चौकीदार नशे में मस्त थे। मुंशी वंशीधर को यहाँ आए अभी छह महीनों से अधिक न हुए थे, लेकिन इस थोड़े समय में ही उन्होंने अपनी कार्यकुशलता और उत्तम आचार से अफ़सरों को मोहित कर लिया था। अफ़सर लोग उन पर बहुत विश्वास करने लगे। नमक के दफ़्तर से एक मील पूर्व की ओर जमुना बहती थी, उस पर नावों का एक पुल बना हुआ था। दारोगाजी किवाड़ बंद किए मीठी नींद से सो रहे थे। अचानक आँख खुली तो नदी के प्रवाह की जगह गाड़ियों की गड़गड़ाहट तथा मल्लाहों का कोलाहल सुनाई दिया। उठ बैठे। इतनी रात गए गाड़ियाँ क्यों नदी के पार जाती हैं? अवश्य कुछ न कुछ गोलमाल है। तर्क ने भ्रम को पुष्ट किया। वरदी पहनी, तमंचा जेब में रखा और बात की बात में घोड़ा बढ़ाए हुए पुल पर आ पहुँचे। गाड़ियों की एक लंबी कतार पुल के पार जाती दिखी। डाँटकर पूछा—किसकी गाड़ियाँ हैं?
थोड़ी देर तक सन्नाटा रहा। आदमियों में कुछ काना-फूसी हुई, तब आगे वाले ने कहा—पंडित अलोपीदीन की!
‘कौन पंडित अलोपीदीन?’
‘दातागंज के।’
मुंशी वंशीधर चौंके। पंडित अलोपीदीन इस इलाके के सबसे प्रतिष्ठित ज़मींदार थे। लाखों रुपये का लेन-देन करते थे, इधर छोटे से बड़े कौन ऐसे थे, जो उनके ऋणी न हों। व्यापार भी बड़ा लंबा-चौड़ा था। बड़े चलते-पुरज़े आदमी थे। अंगरेज़ अफ़सर उनके इलाके में शिकार खेलने आते और उनके मेहमान होते। बारहों मास सदाव्रत चलता था।
गद्यांश के अनुसार पंडित अलोपीदीन के विषय में कौन-सा कथन सही नहीं है?
Answer & explanation
Correct answer: option 2
सही उत्तर विकल्प (2) है → इलाके के लोग उनसे कर्ज़ लेने से बचते थे।
प्रश्न 'सही नहीं' पूछता है; गद्यांश में लिखा है: “इधर छोटे से बड़े कौन ऐसे थे, जो उनके ऋणी न हों।”
अर्थात् इलाके के लगभग सभी लोग उनके ऋणी थे; अतः कर्ज़ से बचने वाली बात गद्यांश के विपरीत है।
अन्य विकल्प — (1), (3) और (4) — तीनों बातें गद्यांश में ज्यों की त्यों कही गई हैं: “सबसे प्रतिष्ठित ज़मींदार”, “अंगरेज़ अफ़सर उनके इलाके में शिकार खेलने आते”, “बारहों मास सदाव्रत चलता था”।