निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित अगले पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
दीवार पर टँगी घड़ी टिक-टिक कहती है,
जो पल अभी हाथ में है, वह भी जाने को है।
सुइयाँ चलती हैं चुपचाप, न रुकतीं, न थकतीं,
नदी की धारा-सी समय की गति बहती है।
वसंत आया, फूलों ने आँगन सजाया,
जेठ की धूप ने फिर सब कुछ तपाया,
सावन बरसा, पतझड़ ने पत्ते गिराए,
देखते-देखते एक बरस बीत गया।
कल की चिंता में जो आज गँवाता है,
वह न कल पाता है, न आज बचाता है।
बीता समय लौटकर कभी नहीं आता,
सोया हुआ अवसर फिर द्वार नहीं खटखटाता।
इसलिए उठो, इस पल को गले लगाओ,
जो करना है, आज और अभी कर जाओ।
पद्यांश के अनुसार काव्य पंक्तियों का सही अनुक्रम है -
(A) सावन बरसा, पतझड़ ने पत्ते गिराए
(B) सुइयाँ चलती हैं चुपचाप, न रुकतीं, न थकतीं
(C) सोया हुआ अवसर फिर द्वार नहीं खटखटाता
(D) जेठ की धूप ने फिर सब कुछ तपाया
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें :
Answer & explanation
Correct answer: option 3
सही उत्तर विकल्प (3) है → (B), (D), (A), (C)
पद्यांश में ये पंक्तियाँ इस क्रम में आती हैं:
(B) सुइयाँ चलती हैं चुपचाप, न रुकतीं, न थकतीं — तीसरी पंक्ति।
(D) जेठ की धूप ने फिर सब कुछ तपाया — छठी पंक्ति।
(A) सावन बरसा, पतझड़ ने पत्ते गिराए — सातवीं पंक्ति।
(C) सोया हुआ अवसर फिर द्वार नहीं खटखटाता — बारहवीं पंक्ति।