निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
हरि गोकुल की प्रीति चलाई।
सुनहु उपँगसुत मोहिं न बिसरत ब्रजवासी सुखदाई॥
यह चित्त होत जाऊँ मैं अबही, यहाँ नहीं मन लागत।
गोप सुग्वाल गाय बन चारत अपि दुख पायो त्यागत॥
कहँ माखन चोरी? कह जसुमति 'पूत जेंव' करी प्रेम।
सूर श्याम से वचन सहित सुनी व्यापत आपन नेम॥
'बिसरना' शब्द का शाब्दिक अर्थ है?
Answer & explanation
Correct answer: option 2
सही उत्तर विकल्प (2) है → भूल जाना
“मोहिं न बिसरत ब्रजवासी सुखदाई” — बिसरना का अर्थ है भूल जाना।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: याद करना — यह 'बिसरना' का विलोम है।
विकल्प 3: देखना — यह 'बिसरना' का अर्थ नहीं है।
विकल्प 4: सुख देना — यह 'सुखदाई' का भाव है।