प्रस्तुत गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उससे सम्बंधित प्रश्नों के उत्तर दीजिये -
मानव जीवन में आत्मसम्मान का अत्यधिक महत्व है। आत्मसम्मान में अपने व्यक्तित्व को अधिक सशक्त एवं प्रतिष्ठित बनाने की भावना निहित होती है। इससे शक्ति, साहस, उत्साह आदि गुणों का जन्म होता है, जो जीवन की उन्नति का मार्ग प्रशस्त करते हैं। आत्मसम्मान की भावना से पूर्ण व्यक्ति संघर्षों की परवाह नहीं करता है और हर विषम परिस्थिति से टक्कर लेता है। ऐसे व्यक्ति जीवन में पराजय का मुँह नहीं देखते तथा निरंतर यश की प्राप्ति करते हैं। आत्मसम्मानी व्यक्ति धर्म, सत्य, न्याय और नीति के पथ का अनुगमन करता है। उसके हृदय में स्वार्थ, लोभ और अहंकार का भाव नहीं होता, निश्छल होने के कारण वह आसुरी प्रवृत्तियों से सर्वथा मुक्त होता है। उसमें ईश्वर के प्रति सच्ची भक्ति एवं विश्वास होता है जिससे उसकी आध्यात्मिक शक्ति का विकास होता है। जीवन को सरल और मधुर बनाने के लिए आत्मसम्मान रसायन तुल्य है। आत्मसम्मान ही ऐसी निर्मल धारा है जो कि हमारी कलुषित भावना को धो देती है। ऐसी पवित्र धारा में स्नान करके हम अपने वर्तमान और भविष्य को उज्ज्वल बना लेते हैं। देश को हम पर अभिमान होता है।
उपर्युक्त गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक हो सकता है-
Answer & explanation
Correct answer: option 3
सही उत्तर विकल्प (3) है → आत्मसम्मान का महत्व
गद्यांश “मानव जीवन में आत्मसम्मान का अत्यधिक महत्व है” से शुरू होकर आत्मसम्मान के लाभ और महत्त्व ही बताता है, इसलिए यही शीर्षक उपयुक्त है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: आत्मा का विश्वास — गद्यांश आत्मा के विश्वास के बारे में नहीं है।
विकल्प 2: मानव का लक्ष्य — मानव के लक्ष्य की चर्चा नहीं है।
विकल्प 4: स्वाभिमान — यह केवल विषय का नाम है; गद्यांश का केंद्रीय भाव (महत्त्व) इसमें नहीं आता।