निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित अगले पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
नींद को अक्सर समय की बर्बादी मान लिया जाता है। काम का बोझ बढ़ने पर सबसे पहले कटौती नींद में ही होती है, मानो वह ऐसा खर्च हो जिसे जब चाहे घटाया जा सके। पर नींद के घंटे निष्क्रियता के घंटे नहीं हैं। जब हम सोते हैं, तब शरीर दिन भर की थकान से उबरता है और मस्तिष्क दिन में मिली जानकारी को छाँटकर सहेजने का काम करता है। यही कारण है कि परीक्षा से पहले रात भर जागकर पढ़ने वाला विद्यार्थी अगले दिन कई बार वही बातें भूल जाता है, जिन्हें उसने बड़ी मेहनत से रटा था।
लगातार कम सोने का असर धीरे-धीरे सामने आता है। व्यक्ति चिड़चिड़ा हो जाता है, किसी काम में देर तक मन नहीं लगा पाता और छोटी-छोटी भूलें करने लगता है। लंबे समय तक ऐसा चलता रहे तो शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ सकता है। नींद की आवश्यकता उम्र के साथ बदलती है; बढ़ते बच्चों और किशोरों को सामान्यतः बड़ों से अधिक नींद चाहिए। अच्छी नींद के लिए कोई महँगा उपाय ज़रूरी नहीं। रोज़ लगभग एक ही समय पर सोना और जागना, सोने से पहले मोबाइल या टीवी की चमकती स्क्रीन से दूरी रखना और शाम के बाद चाय-कॉफ़ी कम लेना जैसी सरल आदतें बहुत मदद करती हैं। नींद को आलस्य नहीं, बल्कि स्वास्थ्य की नींव समझना चाहिए।
गद्यांश के अनुसार सोते समय मस्तिष्क क्या करता है?
Answer & explanation
Correct answer: option 4
सही उत्तर विकल्प (4) है → वह दिन में मिली जानकारी को छाँटकर सहेजता है।
गद्यांश में लिखा है: “मस्तिष्क दिन में मिली जानकारी को छाँटकर सहेजने का काम करता है।”
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: वह दिन भर की सारी जानकारी मिटा देता है। — मस्तिष्क जानकारी मिटाता नहीं, सहेजता है।
विकल्प 2: वह पूरी तरह निष्क्रिय होकर विश्राम करता है। — गद्यांश कहता है: “नींद के घंटे निष्क्रियता के घंटे नहीं हैं”।
विकल्प 3: वह अगले दिन के कामों की योजना बनाता है। — गद्यांश में योजना बनाने की बात कहीं नहीं है।