'या लकुटी अरु कामरिया पर राज तिहूँ पुर को तजि डारौं।
आठहूँ सिद्धि, नवौ निधि को सुख नन्द की धेनु चराय बिसारौं।'
उपर्युक्त पंक्तियाँ किस छंद में रचित हैं ?
Answer & explanation
Correct answer: option 3
सही उत्तर विकल्प (3) है → सवैया
रसखान की इन पंक्तियों के प्रत्येक चरण में सात भगण और अंत में दो गुरु (23 वर्ण) हैं, अतः यह सवैया (मत्तगयंद) छंद है।