निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर उससे संबंधित प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
आधुनिकतावाद के प्रादुर्भाव के ऐतिहासिक कारणों पर एक सरसरी दृष्टि डालने से बहुत कुछ स्पष्ट हो जाता है। यदि यह एक ऐतिहासिक प्रक्रिया की देन है तो फिर इतिहास-निरपेक्ष कैसे होगा? मार्शल बर्मन की एक पुस्तक है- 'आल देट इज सॉलिड मेल्ट्स इनटू एअरस।' वह लिखता है कि आधुनिक जीवन की उथल-पुथल की जिम्मेदारियाँ अनेक स्थितियों पर निर्भर हैं- भौतिक विज्ञान के महान आविष्कार जिससे दुनिया और दुनिया में हमारी स्थिति का 'इमेज' बदल गया है, उत्पादन का उद्योगीकरण जो विज्ञान को टेक्नोलॉजी में बदलता है, शहरों की बढ़ोतरी, दूर संचार माध्यम आदि। इसी का नाम है आधुनिकीकरण। इस प्रक्रिया में हमारी वैश्विक दृष्टि परिवर्तित हुई है और हम अन्य देशों के लोगों के विचारों के समीप आए हैं। आधुनिकीकरण यांत्रिकता, भीड़-भाड़, शहरों की बाढ़ में हम पदार्थीकृत होते जा रहे हैं। यदि आधुनिकतावादी साहित्य इतिहास की इन सही विकृतियों को उजागर करता है तो उसे इतिहास-निरपेक्ष कैसे कहा जा सकता है। पर इसे ग्लोरीफाई नहीं करना चाहिए।
उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक है -
Answer & explanation
Correct answer: option 2
सही उत्तर विकल्प (2) है → आधुनिकीकरण
गद्यांश आधुनिक जीवन की उथल-पुथल के कारणों (भौतिक विज्ञान, उद्योगीकरण, शहरों की बढ़ोतरी, दूर संचार) को गिनाकर कहता है: “इसी का नाम है आधुनिकीकरण”; इसके प्रभावों की चर्चा ही गद्यांश का केंद्र है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: उत्पादन की प्रक्रिया — यह आधुनिकीकरण का केवल एक अंग है।
विकल्प 3: आधुनिक विज्ञान — विज्ञान भी आधुनिकीकरण के कई कारणों में से एक है।
विकल्प 4: आधुनिक जीवन — गद्यांश आधुनिक जीवन का वर्णन नहीं, उसकी उथल-पुथल के कारण बताता है।