निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित अगले पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
हथकरघे पर बुना कपड़ा केवल एक वस्तु नहीं होता, उसमें बुनकर का धैर्य और उसकी पीढ़ियों का अनुभव भी बुना रहता है। मशीन एक ही नमूने को हज़ारों बार बिना भूल के दोहरा सकती है, पर हाथ से बने दो थान कभी पूरी तरह एक जैसे नहीं होते। कहीं धागे का तनाव थोड़ा बदल जाता है, कहीं रंग की छाया हल्की पड़ जाती है। जिसे हम कमी समझ बैठते हैं, वही उस कपड़े की पहचान होती है। ऐसा कपड़ा पहनने वाला अनजाने में ही किसी के श्रम से जुड़ जाता है।
कठिनाई यह है कि बाज़ार चीज़ों को प्रायः उनकी कीमत से तौलता है, उनके पीछे लगे श्रम से नहीं। सस्ता और जल्दी मिलने वाला माल खरीदार को खींच लेता है और बुनकर को अपनी मेहनत का उचित दाम नहीं मिल पाता। धीरे-धीरे उसकी संतान इस काम को घाटे का सौदा मानकर दूसरे धंधों की ओर चली जाती है। इस तरह जो हुनर एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक सिखाया जाता रहा था, वह चुपचाप खोने लगता है। हुनर को बचाने का अर्थ किसी पुरानी चीज़ को संग्रहालय में सजा देना भर नहीं है। उसका सच्चा सम्मान तब होगा जब हम हाथ के काम को दया के कारण नहीं, उसकी गुणवत्ता के कारण चुनें और कारीगर को उसका उचित मूल्य देने में संकोच न करें।
गद्यांश के अनुसार हाथ से बने दो थानों की क्या विशेषता है?
Answer & explanation
Correct answer: option 2
सही उत्तर विकल्प (2) है → धागे या रंग के हल्के अंतर के कारण वे पूरी तरह एक जैसे नहीं होते।
गद्यांश में लिखा है: “हाथ से बने दो थान कभी पूरी तरह एक जैसे नहीं होते। कहीं धागे का तनाव थोड़ा बदल जाता है, कहीं रंग की छाया हल्की पड़ जाती है।”
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: वे मशीन के कपड़े की तरह बिना भूल के एक जैसे होते हैं। — बिना भूल के एक ही नमूना दोहराना मशीन की विशेषता बताई गई है।
विकल्प 3: उनके धागे का तनाव और रंग की छाया कभी नहीं बदलती। — गद्यांश के अनुसार तनाव और रंग की छाया बदल जाती है।
विकल्प 4: वे मशीन के कपड़े से सस्ते और जल्दी तैयार होते हैं। — सस्ता और जल्दी मिलने वाला माल बाज़ार का बताया गया है, हाथ के थान का नहीं।