निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित अगले पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
किसबी, किसान-कुल, बनिक, भिखारी, भाट,
चाकर, चपल नट, चोर, चार, चेटकी।
पेटको पढ़त, गुन गढ़त, चढ़त गिरि,
अटत गहन-गन अहन अखेटकी॥
ऊँचे-नीचे करम, धरम-अधरम करि,
पेट ही को पचत, बेचत बेटा-बेटकी।
‘तुलसी’ बुझाइ एक राम घनस्याम ही तें,
आगि बड़वागितें बड़ी है आगि पेटकी॥
खेती न किसान को, भिखारी को न भीख, बलि,
बनिक को बनिज, न चाकर को चाकरी।
जीविका बिहीन लोग सीद्यमान सोच बस,
कहैं एक एकन सों ‘कहाँ जाई, का करी?’
बेदहूँ पुरान कही, लोकहूँ बिलोकिअत,
साँकरे सबैं पै, राम! रावरें कृपा करी।
दारिद-दसानन दबाई दुनी, दीनबंधु!
दुरित-दहन देखि तुलसी हहा करी॥
कवि के अनुसार बड़वाग्नि (समुद्र की आग) से भी बड़ी आग कौन-सी है?
Answer & explanation
Correct answer: option 2
सही उत्तर विकल्प (2) है → पेट की आग
कवि के अनुसार पेट की आग (भूख) बड़वाग्नि से भी बड़ी है: “आगि बड़वागितें बड़ी है आगि पेटकी”।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: क्रोध की आग — पद्यांश में क्रोध की आग का कोई उल्लेख नहीं।
विकल्प 3: ईर्ष्या की आग — ईर्ष्या की भी कोई बात नहीं कही गई।
विकल्प 4: वन की आग — पद्यांश में बड़वाग्नि से पेट की आग की तुलना है, वन की आग की नहीं।