मन रे तन कागद का पुतला,
लागे बूँद बिनसि जाय छिन में,
गरब करे क्या इतना।
इन पंक्तियों में कौन-सा स्थायी भाव है?
Answer & explanation
Correct answer: option 3
सही उत्तर विकल्प (3) है → निर्वेद
शरीर को कागज़ का पुतला कहकर कवि जीवन की नश्वरता और गर्व की व्यर्थता बताता है; इससे वैराग्य का भाव जागता है, जिसका स्थायी भाव निर्वेद है (शांत रस)।
अन्य विकल्प — जुगुप्सा (वीभत्स), रति (श्रृंगार) और उत्साह (वीर) — इन पंक्तियों के स्थायी भाव नहीं हैं।