निम्नलिखित पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उससे संबंधित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
उठो सोने वालो! सबेरा हुआ है; वतन के फ़कीरों का फेरा हुआ है।
जागो, अब निराशा-निशा खो रही है; सुनहली-सी पूरब दिशा हो रही है;
उषा की किरण कालिमा धो रही है; न अब कौम कोई कहीं सो रही है;
तुम्हें किसलिये मोह घेरा हुआ है। उठो सोने वालो! सबेरा हुआ है।
जवानों! जगो, कौम की जान जागो, पड़े किसलिए देश की शान जागो;
गुलामी मिटे देश उत्थान जागो, शहीदों की सच्ची सुसन्तान जागो;
हटा दूर आलस-अँधेरा हुआ है। उठो सोने वालो! सबेरा हुआ है।
उठो देवियो! वक्त खोने न देना, कहीं फूट के बीज बोने न देना,
जगें जो, उन्हें फिर से सोने न देना, कभी राष्ट्र-अपमान होने न देना;
घड़ी शुभ महूरत का डेरा हुआ है। उठो सोने वालो! सबेरा हुआ है।
निम्नलिखित में से कौन रूपक अलंकार का उदाहरण है?
Answer & explanation
Correct answer: option 3
सही उत्तर विकल्प (3) है → आलस-अँधेरा
आलस-अँधेरा में आलस पर अँधेरे का अभेद आरोप है (आलस रूपी अँधेरा), इसलिए यह रूपक अलंकार है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: देश उत्थान — देश का उत्थान; इसमें कोई आरोप नहीं।
विकल्प 2: सुनहली सी — 'सी' वाचक शब्द से समानता बताई गई है → उपमा अलंकार।
विकल्प 4: राष्ट्र-अपमान — राष्ट्र का अपमान; इसमें कोई आरोप नहीं।