निम्नलिखित पद्यांश के आधार पर प्रश्न का उत्तर दीजिए।
अबिगत गति कछु कहति न आवै!
ज्यों गूंगो मीठे फल कौ रस अन्तर्गत ही भावै॥
परम स्वादु सबहीं जुं निरन्तर अमित तोष उपजावै।
मन बानी कौ अगम अगोचर सो जाने जो पावै॥
रूप रेख गुन जाति जुगति बिनु निरालंब मन चकृत धावै।
सब बिधि अगम बिचारहिं, तातें सूर सगुन लीला पद गावै॥
'जो इन्द्रियों से न जाना जा सके।' इसके लिए एक शब्द है -
Answer & explanation
Correct answer: option 3
सही उत्तर विकल्प (3) है → अगोचर
जो इंद्रियों से न जाना जा सके, वह अगोचर है; पद में भी ब्रह्म को “मन बानी कौ अगम अगोचर” कहा गया है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: जितेंद्रिय — जिसने इंद्रियों को जीत लिया हो।
विकल्प 2: बहुज — बहुत-सी बातें जानने वाला (बहुज्ञ) या बहुत से उत्पन्न।
विकल्प 4: प्रत्यागत — लौटकर आया हुआ।