Target Exam

CUET

Subject

Hindi

Chapter

Comprehension - (Narrative / Factual)

Question:

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर संबंधित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

मानव-मन ही उसके उत्थान या पतन का कारण होता है। जब मानव मन की उमंग पर सवार होकर पुरुषार्थ करता है, तब उसके मार्ग की सारी बाधाएँ ऐसे ही दूर हो जाती हैं, जैसे सूर्योदय होते ही गगन के तारक दल। वहीं पर जो भाग्य को मानकर पुरुषार्थ छोड़ देता है, वह जीवन भर पछताता रहता है। इतिहास साक्षी है कि आदिम युग में सभी जीव (मानव भी) जानवरों की तरह जीवन व्यतीत करते थे। पुरुषार्थ के कारण मानवाभ बन्दर (बंदरों की एक खास प्रजाति) आज सभ्य और सुसंस्कृत मानव बन बैठा और अन्य जानवर पुरुषार्थ-विहीन होने के कारण जानवर ही रह गए। कर्मवादी मानव आशा, विश्वास, हिम्मत और निरंतर कर्मरत रहने के कारण मनोवांछित फल पाता है तो भाग्यवादी मानव निराशा, अविश्वास, आलस्य, ईर्ष्या आदि के कारण असफल होकर विपत्तियों से घिरा रहता है। नीति वचनों में कहा गया है कि उद्यम से ही कार्य की सिद्धि होती है, न कि मनोरथ से। सोते हुए सिंह के मुख में मृग स्वयं प्रवेश नहीं करता, अपितु शिकार प्राप्ति के लिए उसे उद्यम करना पड़ता है। स्पष्ट है कर्म के साथ फल की अनिवार्यता। अतएव, हमें सदैव इस बात को स्मरण रखना चाहिए कि कर्म भाग्य को बदलता रहा है। हम अपनी सफलता या असफलता के खुद जिम्मेदार हैं।

मानवाभ बन्दर के सभ्य और सुसंस्कृत होने का क्या कारण है?

Options:

पुरुषार्थ

जैविक परिवर्तन

मानव सभ्यता का विकास

आशा और विश्वास

Correct Answer:

पुरुषार्थ

Explanation:

सही उत्तर विकल्प (1) है → पुरुषार्थ