सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए :
| सूची-I (रस) | सूची-II (उदाहरण) |
|---|---|
| (A). शृंगार | (I). सुनते ही अपमान को, नैन हुए अंगार। / होंठ फड़कने लग गए, गरजा क्रोध अपार॥ |
| (B). रौद्र | (II). जग की माया झूठ है, झूठे सब संबंध। / मन प्रभु-चरणों में रमा, छूटे सब भव-बंध॥ |
| (C). अद्भुत | (III). फूलों भरी बगिया में, सखियों संग खड़ी बाल। / प्रिय को देख लजा गई, मुख पर छाया गुलाल॥ |
| (D). शांत | (IV). छोटे-से मुख में दिखा, सारा ही संसार। / चकित हुई माँ देखकर, विस्मय अपरंपार॥ |
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए :
Answer & explanation
Correct answer: option 1
सही उत्तर विकल्प (1) है → (A) - (III), (B) - (I), (C) - (IV), (D) - (II)
| सूची-I (रस) | सूची-II | व्याख्या |
|---|---|---|
| (A) शृंगार | (III) फूलों भरी बगिया में, सखियों संग खड़ी बाल। / प्रिय को देख लजा गई, मुख पर छाया गुलाल॥ | प्रिय के दर्शन से नायिका का लजाना; स्थायी भाव रति (संयोग)। |
| (B) रौद्र | (I) सुनते ही अपमान को, नैन हुए अंगार। / होंठ फड़कने लग गए, गरजा क्रोध अपार॥ | अपमान से आँखें लाल, होंठ फड़कना; स्थायी भाव क्रोध। |
| (C) अद्भुत | (IV) छोटे-से मुख में दिखा, सारा ही संसार। / चकित हुई माँ देखकर, विस्मय अपरंपार॥ | मुख में संसार दिखना; स्थायी भाव विस्मय। |
| (D) शांत | (II) जग की माया झूठ है, झूठे सब संबंध। / मन प्रभु-चरणों में रमा, छूटे सब भव-बंध॥ | संसार को मिथ्या मानकर वैराग्य; स्थायी भाव निर्वेद। |