सूची I का सूची II से मिलान कीजिए
|
सूची I |
सूची II |
|
A. रिझि रिझि रहसि रहसि हँसि हँसि उठे |
I. श्लेष अलंकार |
|
B. माया महाठगिनि हम जानी तिरगुन फाँस लिए कर डोलै, बोलै मधुरी बानी |
II. अनुप्रास अलंकार |
|
C. नवल सुंदर श्याम शरीर की सजल नीरद-सी कल कांति थी |
III. अतिशयोक्ति अलंकार |
|
D. हनुमान की पूँछ में लगन न पाई आग लंका सिगरी जल गई, गए निसाचर भाग |
IV. उपमा अलंकार |
निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
Answer & explanation
Correct answer: option 1
सही उत्तर विकल्प (1) है → A-II, B-I, C-IV, D-III
| सूची-I (पंक्ति) | सूची-II (अलंकार) | व्याख्या |
|---|---|---|
| (A) रिझि रिझि रहसि रहसि हँसि हँसि उठे | (II) अनुप्रास अलंकार | 'र' और 'ह' वर्णों की आवृत्ति। |
| (B) माया महाठगिनि हम जानी … | (I) श्लेष अलंकार | 'तिरगुन' के दो अर्थ — तीन गुण (सत्त्व, रज, तम) और तीन धागों वाली रस्सी। |
| (C) नवल सुंदर श्याम शरीर की … | (IV) उपमा अलंकार | 'नीरद-सी' — 'सी' वाचक शब्द से शरीर की तुलना बादल से। |
| (D) हनुमान की पूँछ में लगन न पाई आग … | (III) अतिशयोक्ति अलंकार | आग लगने से पहले ही लंका जल गई — बढ़ा-चढ़ाकर वर्णन। |