शांत होओ, धीमे बोलो ओ मन
झुकाओ शीश।
दिवस का अवसान, आ रही संध्या शांतिमयी
तिमिर-तट पर असंख्य दीप जलाने वाली
आरती- वेला
आयी इस विश्वमंदिर प्रांगण में
सुनो, अनंत में वह बाज रही
निःशब्द गम्भीर मंद्र शंखध्वनि।
इस शुभ क्षण शांत मन, संध्या- प्रकाश में
संधि कर लो - अनंत के साथ।
उपरोक्त काव्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें:-
'गम्भीर' शब्द का विपरीतार्थक होगा:
Answer & explanation
Correct answer: option 4
सही उत्तर विकल्प (4) है → चपल
गम्भीर (शांत, धीर) का विपरीतार्थक चपल (चंचल) है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: प्रशांत — अर्थ: अत्यंत शांत; यह गंभीर के निकट का अर्थ है।
विकल्प 2: शांत — यह भी गंभीर के निकट का अर्थ है।
विकल्प 3: वाचाल — अर्थ: बहुत बोलने वाला; इसका विलोम मितभाषी है।