निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
किसी पेड़ पर टाँग दो
अपनी निष्ठा, विश्वास, ईमानदारी
के अस्त्र-शस्त्र
चलते बनो
अज्ञातवास की ओर
ध्यान रहे इस युग में
इसकी कोई समय और सीमा नहीं।
पैरों से जुते कन्धों की गाड़ी पर
हर इनसान ढो रहा है अपनी ज़िन्दगी
स्वयं ही सवार है किस्मत के पथ पर
अपनी मिट्टी की गाड़ी पर
क्या पता वह कब टकरा जाए
उस समय के पत्थर से
जो उसे मंजिल की दूरी नहीं,
उम्र का हिसाब बता रहा हो
शायद बोझ समझ इसलिए वह ज़िन्दगी
अपनी मिट्टी की गाड़ी पर ढो रहा हो।
मिट्टी की गाड़ी किससे टकरा सकती है?
Answer & explanation
Correct answer: option 1
सही उत्तर विकल्प (1) है → समय के पत्थर से
काव्यांश कहता है: “क्या पता वह कब टकरा जाए उस समय के पत्थर से”।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 2: किसी भी इनसान से — इनसान तो गाड़ी पर सवार है; उससे टकराने की बात नहीं।
विकल्प 3: मंजिल से — समय का पत्थर मंजिल की दूरी नहीं, उम्र का हिसाब बताता है।