निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
माटी तुझे प्रणाम,
मेरे पुण्य देश की माटी तू कितनी अभिराम।
तुझे लगा माथे से सारे कष्ट हो गए दूर,
क्षण भर में ही भूल गया मैं शक्ति मंत्रणा क्रूर।
स्फूर्ति का इस काया में हुआ पुनः संचार,
लगता जैसे आज युगों के बाद मिला विश्राम।
तुझसे बिछड़कर मिला प्राणों को कभी न पल भर चैन,
तेरे दर्शन हेतु रात दिन तरस रहे थे नैन।
धन्य हुआ तेरे चरणों में आकर यह अस्तित्व,
हुई साधना सफल भगत को प्राप्त हो गए राम।
माटी तुझे प्रणाम।
कवि माटी को सिर पर लगाने से क्या महसूस कर रहा है?
Answer & explanation
Correct answer: option 2
सही उत्तर विकल्प (2) है → सुख-स्फूर्ति
“तुझे लगा माथे से सारे कष्ट हो गए दूर ... स्फूर्ति का इस काया में हुआ पुनः संचार” — माटी माथे से लगाने पर कवि के कष्ट दूर हुए और शरीर में स्फूर्ति आई, अर्थात् उसे सुख-स्फूर्ति का अनुभव हुआ।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: दुःख — कवि के तो सारे कष्ट दूर हो गए।
विकल्प 3: निराशा — कवि को विश्राम और स्फूर्ति मिली।
विकल्प 4: आशा — पद्यांश में आशा की नहीं, मिले हुए सुख की बात है।