'टूट चाप नहि जुरै रिसाने' - इस मुहावरे का अर्थ है:
Answer & explanation
Correct answer: option 2
सही उत्तर विकल्प (2) है → नुकसान हो जाने पर क्रोध करना व्यर्थ है
टूट चाप नहि जुरै रिसाने (टूटा धनुष क्रोध करने से नहीं जुड़ता) का भाव है कि नुकसान हो जाने के बाद क्रोध करना व्यर्थ है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: टूटा धनुष क्रोध करने से नहीं जुड़ता — यह पंक्ति का शब्दार्थ है; पूछा गया अर्थ (भाव) विकल्प 2 में है।
विकल्प 3: चिंता छोड़ो, सुख से जिओ — इसमें क्रोध या नुकसान की बात नहीं है।
विकल्प 4: नुकसान के लिए परेशान नहीं होना चाहिए — पंक्ति 'रिसाने' (क्रोध करने) की व्यर्थता बताती है, केवल परेशान होने की नहीं।