बतरस लालच लाल की, मुरली धरी लुकाय।
सौंह करे, भौंहनि हँसे, देन कहे, नटि जाय।।
नासा मोरि, नचाइ दृग, करी कका की सौंह।
काँटे सी कसके हिए, गड़ी कँटीली भौंह।।
ललन चलन सुनि पलन में, अँसुवा झलके आइ।
भई लखाइ न सखिन्ह हू, झूठै ही जमुहाइ।।
उपरोक्त पद्यांश से संबंधित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर बताएं
उपरोक्त पद्यांश में किस रस की सृष्टि हो रही है?
Answer & explanation
Correct answer: option 3
सही उत्तर विकल्प (3) है → शृंगार रस
नायिका का कृष्ण से बात करने के लिए मुरली छिपाना, भौंहों से हँसना और उनके जाने की बात सुनकर आँसू आना — यह रति (प्रेम) भाव है, इसलिए शृंगार रस है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: वीर रस — स्थायी भाव उत्साह।
विकल्प 2: करुण रस — स्थायी भाव शोक; यहाँ आँसू प्रिय के वियोग की आशंका के हैं।
विकल्प 4: वात्सल्य रस — स्थायी भाव संतान-प्रेम।