निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर अगले पांच प्रश्नों के उत्तर दीजिये।
अहिंसा का मतलब कमजोरी नहीं है। भाग जाना अहिंसा नही है। यदि शत्रु के सामने निःशस्त्र खड़े रहने की तैयारी न हो, तो उसके ऊपर प्रहार की तैयारी में खड़े रहो। लेकिन भाग जाना, तो पूरी तरह त्याज्य और निन्द्य है। इसी बात को गाँधी जी ने सौ बार कहा है, "यदि आप शस्त्रों से स्वराज्य ले सकते हैं, तो आप उसे ले लीजिये। मै दूर खड़ा रहूँगा। लेकिन गुलाम मत रहिए और यदि शस्त्रों से न लड़ सके, तो मेरी निःशस्त्र लड़ाई में शामिल हो जाइए। स्वतंत्रता की लड़ाई तो हमें चालू रखनी ही पड़ेगी। भयभीत होकर सच्चाई के मार्ग से विमुख हो जाना, अहिंसा नहीं कायरता है। इसी कायरता के कारण जातियां गुलाम होती हैं। गुलामी में सड़ते रहना, तो मनुष्यों को शोभा नही देता" गाँधी जी का यह कहना नहीं था कि कल देखते-देखते सारी सेनाएं मिट जाएँगी। भारत को भी सेना, शस्त्रास्त्र सबकी जरूरत पड़ेगी। गीता के अठारहवें अध्याय में कहा गया है कि मारने पर भी मारना उचित नहीं होता है। लेकिन यह स्थिति किसकी है? जिसे सारा विश्व अपने जैसा दिखाई देता है, उसके मारने में जीवन ही है। माँ बच्चे को मारती है, पर बच्चा माँ के गोद में छिपकर रोता है, इसीलिए माँ का मारना, मारना नहीं होता। राम ने रावण को मारा, लेकिन हम कहते हैं कि उससे रावण का उद्धार हो गया, तो फिर राम का मारना भी हिंसा नहीं कहा जा सकता।
गाँधी जी ने लोगों से क्या कहा?
Answer & explanation
Correct answer: option 1
सही उत्तर विकल्प (1) है → स्वतंत्रता हेतु आप मेरी निःशस्त्र लड़ाई में शामिल हो जाइये
गद्यांश की पंक्ति: “यदि शस्त्रों से न लड़ सके, तो मेरी निःशस्त्र लड़ाई में शामिल हो जाइए।”
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 2: आप जो कर रहे हैं वह निन्द्य है — गद्यांश में केवल भाग जाने को निन्द्य कहा गया है।
विकल्प 3: केवल शस्त्र से ही … — गाँधी जी निःशस्त्र लड़ाई का मार्ग भी बताते हैं।
विकल्प 4: गुलाम होकर भी जीवन जी सकते हैं — गाँधी जी कहते हैं “गुलाम मत रहिए”।