प्रस्तुत पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उससे सम्बंधित प्रश्नों के उत्तर दीजिये -
वर्षा ऋतु की स्निग्ध भूमिका, प्रथम दिवस आषाढ़ मास का
देख गगन में श्याम घन-घटा, विधुर यक्ष का मन जब उचटा
खड़े-खड़े तब हाथ जोड़कर, चित्रकूट के सुभग शिखर पर
उस बेचारे ने भेजा था, जिनके ही द्वारा संदेशा
उन पुष्करावर्त मेघों का, साथी बनकर उड़नेवाले-
कालिदास ! सच-सच बतलाना
पर पीड़ा से पूर-पूर हो, थक-थककर औ चूर-चूर हो
अमल-धवल गिरि के शिखरों पर, प्रियवर ! तुम कब तक सोये थे
रोया यक्ष कि तुम रोये थे
कालिदास ! सच-सच बतलाना ।
पद्यांश में प्रयुक्त 'विधुर' शब्द का अर्थ है?
Answer & explanation
Correct answer: option 3
सही उत्तर विकल्प (3) है → जिसकी पत्नी का देहांत हो गया हो
विधुर का शब्दकोशीय अर्थ है वह पुरुष जिसकी पत्नी का देहांत हो गया हो; NTA ने यही अर्थ लिया है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: जो विरह में डूबा हो — ऐसे व्यक्ति को विरही कहते हैं।
विकल्प 2: जिसकी पत्नी साथ नहीं रहती हो — यह विधुर का शब्दकोशीय अर्थ नहीं है।
विकल्प 4: जो बहुत दुःख में जीवन बिता रहा हो — यह दुखी व्यक्ति का सामान्य वर्णन है।
नोट: पद्यांश (मेघदूत का प्रसंग) में यक्ष की पत्नी जीवित है और उससे दूर अलका में है; इस संदर्भ में 'विधुर' का भाव पत्नी से बिछुड़ा, विरही है, जो विकल्प (1) और (2) के निकट है। एक ही उत्तर चुनना हो तो शब्द का मानक अर्थ, विकल्प (3), लिया जाता है।