निम्नलिखित पद्यांश के आधार पर अगले पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
अस्ताचल रवि, जल छल-छल छवि,
स्तब्ध विश्वकवि, जीवन उन्मन।
मन्द पवन बहती सुधि रह रह,
परिमल की कह कथा पुरातन।
दूर नदी पर नौका सुन्दर,
दिखी मृदु टार बहती ज्यों स्वर।
वहां स्नेह की प्रतनु देह की,
बिना गेह की बैठी नूतन।
ऊपर शोभित मेघ सत्र सित,
नीचे अमित नील जल दोलित।
ध्यान नयन, मन चिन्त्य-प्राण-धन,
किया शेष रवि ने कर अर्पण।
उपर्युक्त कविता का उचित शीर्षक क्या हो सकता है ?
Answer & explanation
Correct answer: option 1
सही उत्तर विकल्प (1) है → दिवा-गमन
कविता “अस्ताचल रवि” से शुरू होकर “किया शेष रवि ने कर अर्पण” पर समाप्त होती है; पूरा वर्णन दिन के ढलने का है, इसलिए दिवा-गमन उचित शीर्षक है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 2: निशा आगमन — कविता में रात का वर्णन नहीं, केवल दिन का अंत है।
विकल्प 3: उदित रवि — रवि अस्त हो रहा है, उदित नहीं।
विकल्प 4: सूर्य अर्पण — यह केवल अंतिम पंक्ति का भाव है, पूरी कविता का नहीं।