निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न का उत्तर दीजिए:-
दैन्य दुख अपमान ग्लानी
चिर क्षुधित पिपासा, मृत अभिलाषा
बिना आय की क्लांति बन रही
उसके जीवन की परिभाषा
जड़ अनाज के ढेर सदृश ही
वह दिन भर बैठा गद्दी पर
बात-बात पर झूठ बोलता
काडी- सी स्पर्धा में मर-मर|
फिर भी क्या कुटुंब पलता है?
रहते स्वच्छ सुधर सब परिजन?
बना पर रहा वह पक्का घर?
मन में सुख है?जुटता है धन?
खिसक गयी कंधों से कथड़ी
ठिठुर रहा अब सर्दी से तन,
सोच रहा बस्ती का बनिया
घोर विवशता का निज कारण|
दैन्य दुख अपमान ग्लानी
चिर क्षुधित पिपासा, मृत अभिलाषा
बिना आय की क्लांति बन रही
उसके जीवन की परिभाषा
जड़ अनाज के ढेर सदृश ही
वह दिन भर बैठा गद्दी पर
बात-बात पर झूठ बोलता
काडी- सी स्पर्धा में मर-मर|
फिर भी क्या कुटुंब पलता है?
रहते स्वच्छ सुधर सब परिजन?
बना पर रहा वह पक्का घर?
मन में सुख है?जुटता है धन?
खिसक गयी कंधों से कथड़ी
ठिठुर रहा अब सर्दी से तन,
सोच रहा बस्ती का बनिया
घोर विवशता का निज कारण|
निम्नलिखित में से मृत का विलोम क्या है?
Answer & explanation
Correct answer: option 3
मृत का विलोम होता है जीवन|