निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
हरि गोकुल की प्रीति चलाई।
सुनहु उपँगसुत मोहिं न बिसरत ब्रजवासी सुखदाई॥
यह चित्त होत जाऊँ मैं अबही, यहाँ नहीं मन लागत।
गोप सुग्वाल गाय बन चारत अपि दुख पायो त्यागत॥
कहँ माखन चोरी? कह जसुमति 'पूत जेंव' करी प्रेम।
सूर श्याम से वचन सहित सुनी व्यापत आपन नेम॥
'चित्त' शब्द का पर्यायवाची है?
Answer & explanation
Correct answer: option 4
सही उत्तर विकल्प (4) है → हृदय
“यह चित्त होत जाऊँ मैं अबही” — चित्त का अर्थ है मन, हृदय।
अन्य विकल्प — कान, नाक और हाथ — शरीर के अंग हैं, चित्त के पर्याय नहीं।