नीचे दिए गए पद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिये -
लक्ष्मी थी या दुर्गा थी, वह स्वयं वीरता की अवतार,
देख मराठे पुलकित होते उसके तलवारों के वार,
नकली युद्ध, व्यूह की रचना और खेलना खूब शिकार,
सैन्य घेरना, दुर्ग तोड़ना ये थे उसके प्रिय खिलवार,
महाराष्ट्र कुलदेवी उसकी भी आराध्य भवानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।
हुई वीरता की वैभव के साथ सगाई झाँसी में,
ब्याह हुआ रानी बन आई लक्ष्मीबाई झाँसी में,
राजमहल में बजी बधाई खुशियाँ आई झाँसी में,
सुभट बुंदेलों की विरुदावलि-सी वह आई झाँसी में।
इस कविता का मूल रस है -
Answer & explanation
Correct answer: option 4
सही उत्तर विकल्प (4) है → वीर
कविता में रानी को “वीरता की अवतार” कहा गया है और तलवार, युद्ध, दुर्ग तोड़ने का वर्णन है; इससे उत्साह (वीर रस का स्थायी भाव) जागता है, इसलिए मूल रस वीर है।
अन्य विकल्प — करुण (शोक), भक्ति (भगवद्-रति) और श्रृंगार (रति) — के भाव इस कविता में प्रधान नहीं हैं।