निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित अगले पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
खेती की शुरुआत से ही किसान अपनी अच्छी फसल के कुछ दाने अगले मौसम की बुआई के लिए बचाकर रखते आए हैं। पीढ़ी-दर-पीढ़ी चुने और सँभाले गए ऐसे बीजों को देसी बीज कहा जाता है। इनकी एक बड़ी खूबी यह है कि ये अपने इलाके की मिट्टी, पानी और मौसम के अनुरूप ढल चुके होते हैं। कम वर्षा वाले क्षेत्रों की कई देसी किस्में थोड़े पानी में भी पनप जाती हैं, तो कुछ तटीय इलाकों की किस्में मिट्टी के खारेपन को काफ़ी हद तक सह लेती हैं। पिछले कुछ दशकों में अधिक उपज देने वाली नई किस्में फैलीं और अनेक देसी किस्में खेतों से गायब होने लगीं। नई किस्मों ने पैदावार तो बढ़ाई, पर उनमें से कई को अच्छी फसल के लिए अधिक पानी और खाद चाहिए, और उनके बीज अक्सर हर साल बाज़ार से खरीदने पड़ते हैं।
जब पूरे इलाके में एक ही किस्म बोई जाती है, तो कोई नया रोग या मौसम की मार सारी फसल को एक साथ चपेट में ले सकती है। अलग-अलग किस्में इस जोखिम को बाँट देती हैं। इसी समझ के साथ कई गाँवों में किसानों ने बीज-बैंक बनाए हैं। वहाँ से किसान बीज उधार लेते हैं और फसल कटने पर लिए गए बीज से कुछ अधिक लौटा देते हैं, ताकि भंडार बढ़ता रहे। देसी बीजों को बचाना पुरानी चीज़ों से मोह भर नहीं है। बदलते मौसम में खेती को टिकाऊ बनाए रखने के लिए भी यह ज़रूरी है।
गद्यांश में प्रयुक्त 'अनुरूप' शब्द का अर्थ है:
Answer & explanation
Correct answer: option 2
सही उत्तर विकल्प (2) है → के अनुकूल
गद्यांश में लिखा है: “ये अपने इलाके की मिट्टी, पानी और मौसम के अनुरूप ढल चुके होते हैं।”
यहाँ 'अनुरूप' का अर्थ है मेल खाता हुआ, अनुकूल; इसी कारण देसी किस्में थोड़े पानी या खारेपन में भी पनप जाती हैं।
अन्य विकल्प — (1), (3) और (4) — 'प्रतिकूल' तो उलटा अर्थ है, और 'अनजान' व 'अधिक' का 'अनुरूप' से कोई संबंध नहीं।