निम्नलिखित पंक्तियों में कौन-सा रस है?
मुझ कर्ण का कर्तव्य दृढ़ है, माँगने आए किसे।
निज हाथ से झट काट अपना शीश भी देता उसे॥
बस, क्या हुआ फिर अधिक, घर पर आ गया अतिथि।
हूँ दे रहा कुंडल तथा तन प्राण ही अपने इसे॥
Answer & explanation
Correct answer: option 2
सही उत्तर विकल्प (2) है → वीर रस
कर्ण माँगने आए अतिथि को अपना शीश, कुंडल और प्राण तक देने को तैयार है; दान का उत्साह स्थायी भाव है, इसलिए यहाँ वीर रस (दानवीर) है।
अन्य विकल्प — भयानक (स्थायी भाव: भय), शांत (निर्वेद) और रौद्र (क्रोध) — इन पंक्तियों के भाव से मेल नहीं खाते।