निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित अगले पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
ईंट-ईंट पर नाम लिखा है, जिनके खारे पसीने का,
उनको ही अधिकार नहीं है, इस नगरी में जीने का।
ऊँचे-ऊँचे भवन खड़े हैं, बादल से बतियाते हैं,
नींव जिन्होंने रखी उन्हीं को, दरवाज़े ठुकराते हैं।
सुबह-सवेरे सिर पर गारा, धूप में तपती काया है,
काँच-महल के हर कोने में, इनके श्रम की छाया है।
साँझ ढले फुटपाथों पर ही, फटी दरी बिछ जाती है,
चूल्हे की धुँधली लौ में फिर, आधी रोटी पक जाती है।
बच्चे पूछें — “बापू, अपना घर कब हम बनवाएँगे?”
बापू हँसकर कह देता है — “अगले बरस बसाएँगे।”
यह नगरी जगमग-जगमग है, पर उनका जीवन अँधियारा,
जिनके हाथों ने गढ़ डाला, शहर का हर कोना सारा।
‘धूप में तपती काया है’ पंक्ति में ‘काया’ शब्द का पर्यायवाची है -
Answer & explanation
Correct answer: option 4
सही उत्तर विकल्प (4) है → देह
काया का अर्थ है शरीर या देह: “सुबह-सवेरे सिर पर गारा, धूप में तपती काया है”।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: छाया — ‘छाया’ का अर्थ है परछाईं।
विकल्प 2: आत्मा — ‘आत्मा’ शरीर के भीतर की चेतना है, शरीर नहीं।
विकल्प 3: वस्त्र — ‘वस्त्र’ का अर्थ है कपड़ा।