"सोच रहे थे, जीवन सुख है, न यह विकट पहेली है
भाग अरे मनु! इन्द्रजाल से इतनी व्यथा न झेली है?"
उपर्युक्त पंक्तियों में कौन सा रस है ?
Answer & explanation
Correct answer: option 2
सही उत्तर विकल्प (2) है → शान्त रस
मनु जीवन को विकट पहेली और इन्द्रजाल मानकर उससे विरक्त हो रहे हैं; स्थायी भाव निर्वेद होने से यहाँ शांत रस है।
अन्य विकल्प — वात्सल्य (स्थायी भाव: वत्सलता), भक्ति (भगवद्-विषयक रति) और वीभत्स (जुगुप्सा) — के भाव इन पंक्तियों में नहीं हैं।