निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित अगले पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
मधुप गुन-गुना कर कह जाता कौन कहानी यह अपनी,
मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ देखो कितनी आज घनी।
इस गंभीर अनंत-नीलिमा में असंख्य जीवन-इतिहास
यह लो, करते ही रहते हैं अपना व्यंग्य-मलिन उपहास
तब भी कहते हो—कह डालूँ दुर्बलता अपनी बीती।
तुम सुनकर सुख पाओगे, देखोगे—यह गागर रीती।
किंतु कहीं ऐसा न हो कि तुम ही खाली करने वाले—
अपने को समझो, मेरा रस ले अपनी भरने वाले।
यह विडंबना! अरी सरलते तेरी हँसी उड़ाऊँ मैं।
भूलें अपनी या प्रवंचना औरों की दिखलाऊँ मैं।
उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ, मधुर चाँदनी रातों की।
अरे खिल-खिला कर हँसते होने वाली उन बातों की।
मिला कहाँ वह सुख जिसका मैं स्वप्न देखकर जाग गया।
आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया।
जिसके अरुण-कपोलों की मतवाली सुंदर छाया में।
अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में।
पद्यांश के अनुसार कवि अपनी कथा कहने में संकोच करता है, क्योंकि -
Answer & explanation
Correct answer: option 3
सही उत्तर विकल्प (3) है → उसे अपनी ही सरलता की हँसी उड़ानी पड़ेगी
कवि को लगता है कि अपनी कथा कहने पर उसे अपनी सरलता की हँसी उड़ानी पड़ेगी और अपनी भूलें या दूसरों की प्रवंचना दिखानी होगी: “यह विडंबना! अरी सरलते तेरी हँसी उड़ाऊँ मैं”।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: कथा याद नहीं रही — कवि को सुख का स्वप्न और बीती बातें याद हैं; पद्यांश में भूलने की बात नहीं।
विकल्प 2: समय नहीं बचा — पद्यांश में समय की कमी का कोई उल्लेख नहीं है।
विकल्प 4: सुनने वाले नहीं चाहते — उलटे, सुनने वाले कथा कहने का आग्रह करते हैं: “तब भी कहते हो—कह डालूँ दुर्बलता अपनी बीती”।