प्रस्तुत गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए: आज हमारे सामने युद्ध की ऐसी उलझन भरी, दुस्साध्य और भयानक समस्या उपस्थित है, जिससे बचा नहीं जा सकता। प्रश्न यह है कि क्या हम सदा के लिए युद्ध बंद करने की घोषणा कर सकते हैं या इसके विपरीत हम मनुष्य जाति को समूल नष्ट करना चाहते हैं। यदि हम सदैव के लिए युद्ध से विमुख हो जाते हैं, तो हम एक ऐसे सुखी समाज का निर्माण कर सकते हैं, जिसमें ज्ञान और विज्ञान की सतत प्रगति हो रही हो, कलाएँ अपनी सतरंगी आभा बिखेर रही हों और मानव सभ्यता उत्तम मानवीय मूल्यों के विकास में निरंतर रत हो। क्या इस स्वर्गिक आनंद के बदले विनाशक मृत्यु को हम इसलिए चाहते हैं, क्योंकि हम अपने झगड़े समाप्त नहीं कर सकते? हम अपने मनुष्य होने के नाते मनुष्यता के नाम पर यह प्रार्थना करते हैं कि आप सब कुछ भूलकर केवल अपनी मानवता को याद रखें। यदि आप यह कर सकते हैं तो निश्चय ही एक नए और महान भविष्य के लिए रास्ता खुला है, किन्तु यदि आपको यह मंजूर नहीं है तो आपके सामने मानव मात्र के महाविनाश का संकट उपस्थित है। |
गद्यांश में किसके नाम पर युद्ध नहीं करने की प्रार्थना की गई है? |
संकट के नाम पर जीवन के नाम पर मनुष्यता के नाम पर सभ्यता के नाम पर |
मनुष्यता के नाम पर |
सही उत्तर विकल्प (3) है → मनुष्यता के नाम पर |