यहां तक कि इंसान को पहनना क्या चाहिए? अपने सिर को ढांपना चाहिए या नहीं? और खाना क्या चाहिए? कौन सी चीज़ खाने के लिए वर्जित है और कौन सी अवर्जित? और इंसान के दिल में मुहब्बत जैसा अहसास कौन सी जाति की लड़की या कौन से मज़हब के लड़के के लिए पैदा होना चाहिए? - यह सब हिदायतें भी लोगों को वही देते हैं।
इन इजाज़तों और पाबंदियों का सिलसिला इतना लम्बा है कि हमारे देश में पैदा होने वाला हर बच्चा, जो संयोग से जिस जाति का नाम धारण करने वाले मां-बाप के घर पैदा हो जाता है या जिस मजहब को मानने वाले मां-बाप के घर जन्म लेता है तो उस जाति के और उस मज़हब के कानून उस पर इस तरह लागू हो जाते हैं कि वह जब तक जीता है, वह इजाज़तों और पाबंदियों की पकड़ से नहीं निकल पाता।
श्री रामनारायण उपाध्याय का निबंध पढ़कर मुझे जहाँ उनके लिए प्यार और सत्कार का अहसास हुआ, वहाँ एक खौफ़ का अहसास भी हुआ, और मैंने उन्हें जल्दी से खत लिखा- 'अब आप बताइए कि अगर भगवान के वारिसों ने मुझ पर हरजाने का मुकद्दमा दायर कर दिया कि मैंने उनके भगवान से, बहाने से कलम मांगी थी और फिर वापिस नहीं दी तो मैं क्या करूंगी?'
और साथ ही मैंने लिखा- 'आप बताइए, मैं यह किस तरह साबित करूंगी कि मैंने झूठ बोल कर भगवान से कभी कुछ नहीं लिया। मेरे दोस्त! आपने एक दस्तावेज़ बना कर लोगों के सामने रख दिया है, और उसके आधार पर मुकद्दमा करने वाले कई गवाहियां तैयार कर लेंगे, लेकिन मेरी तरफ से गवाही कौन देगा कि मैंने भगवान के आगे कभी झूठ नहीं बोला।'
उपरोक्त गद्यांश से संबंधित निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर बताएं।
हमारे देश में बच्चे की संस्कृति को धर्म किस प्रकार तय करता है-
Answer & explanation
Correct answer: option 1
सही उत्तर विकल्प (1) है → जन्म से
गद्यांश के अनुसार बच्चा “जिस मजहब को मानने वाले मां-बाप के घर जन्म लेता है”, उसी मज़हब के कानून उस पर लागू हो जाते हैं; अर्थात् धर्म जन्म से तय होता है।
अन्य विकल्प — उसकी इच्छा, धार्मिक विश्वास और इतिहास — गद्यांश के अनुसार इनसे धर्म तय नहीं होता।