निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित अगले पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
चिमटे ने सभी को मोहित कर लिया, लेकिन अब पैसे किसके पास धरे हैं। फिर मेले से दूर निकल आए हैं, नौ कब के बज गए, धूप तेज़ हो रही है। घर पहुँचने की जल्दी हो रही है। बाप से ज़िद भी करें, तो चिमटा नहीं मिल सकता। हामिद है बड़ा चालाक। इसीलिए बदमाश ने अपने पैसे बचा रखे थे।
अब बालकों के दो दल हो गए हैं। मोहसिन, महमूद, सम्मी और नूरे एक तरफ़ हैं, हामिद अकेला दूसरी तरफ़। शास्त्रार्थ हो रहा है। सम्मी तो विधर्मी हो गया। दूसरे पक्ष से जा मिला; लेकिन मोहसिन, महमूद और नूरे भी, हामिद से एक-एक, दो-दो साल बड़े होने पर भी हामिद के आघातों से आतंकित हो उठे हैं। उसके पास न्याय का बल है और नीति की शक्ति। एक ओर मिट्टी है, दूसरी ओर लोहा, जो इस वक्त अपने को फ़ौलाद कह रहा है। वह अजेय है, घातक है। अगर कोई शेर आ जाए, तो मियाँ भिश्ती के छक्के छूट जाएँ, मियाँ सिपाही मिट्टी की बंदूक छोड़कर भागें, वकील साहब की नानी मर जाए, चोगे में मुँह छिपाकर ज़मीन पर लेट जाएँ। मगर यह चिमटा, यह बहादुर, यह रुस्तमे-हिंद लपककर शेर की गरदन पर सवार हो जाएगा और उसकी आँखें निकाल लेगा।
मोहसिन ने एड़ी-चोटी का ज़ोर लगाकर कहा — अच्छा, पानी तो नहीं भर सकता। हामिद ने चिमटे को सीधा खड़ा करके कहा — भिश्ती को एक डाँट बताएगा तो दौड़ा हुआ पानी लाकर उसके द्वार पर छिड़कने लगेगा।
गद्यांश में प्रयुक्त मुहावरे 'छक्के छूट जाना' का अर्थ है:
Answer & explanation
Correct answer: option 3
सही उत्तर विकल्प (3) है → बुरी तरह घबरा जाना
गद्यांश में लिखा है: “अगर कोई शेर आ जाए, तो मियाँ भिश्ती के छक्के छूट जाएँ”
शेर के आने पर भिश्ती का घबरा जाना ही यहाँ अभिप्रेत है; अगले ही अंश में सिपाही के भागने की बात है।
अन्य विकल्प — (1), (2) और (4) — प्रसन्नता, जीत या थकान का भाव इस मुहावरे में नहीं है; शेर के सामने भिश्ती डर जाएगा।